Pachra geet lyrics 2

 यह गीत एक प्रसिद्ध गीत है, इसे खास तौर पर नवरात्रि के महोत्सव पर गाया जाता है । 

इस गीत को पंडित युवराज पांडे जी ने गाया है। 


 पचरा गीत - ये हो महामाया कइसे के गुण तोर गांव - युवराज पांडे - Pachra Geet Lyrics - Yuvraj Pandey Jas Geet Lyrics

                          पचरा गीत 


ये हो महामाया कइसे के गुण तोर गांव

 Pachra Geet Lyrics

Yuvraj Pandey Jas Geet Lyrics 

गीत - ये हो महामाया कइसे के गुण तोर गांव

स्वर - पं. युवराज पांडे

गीतकार - पारंपरिक पचरा गीत

संगीत - पं. युवराज पांडे

लेबल - बोल कालिया



                           स्थायी


ये हो महामाई कइसे के गुण तोर गांव

ये हो महामाई कइसे के गुण तोर गांव



हो ये हो महामाई कईसे के गुण तोर गांव

हो ये हो जगजननी कईसे के गुण तोर गांव




                   अंतरा 1


जब महिसासुर के बाढे पाप

सब देवता मन हा करे संताप

पापी ला देखे सब थर्राय

कोनो हाय अरे कोन बचाय

हे अधम पापी हे वरदानी

तेखरे ले तो करे मनमानी

य हो भवानी तै कल्याणी

जगतारन शिव के पटरानी



यहो रूद्र दुलारी घोर कराली

तोर अचरा के मांगव छांव 


हो ये हो माया कईसे के गुण तोर गांव

हो ये हो जगजननी कईसे के गुण तोर गांव




                     अंतरा 2


हो सकल चराचर तै हस व्यापे

पापी मन सब देख के कांपे

घोर घोर महाघोर स्वरूपा

आदि अनादि अनंत अनुपा 

हरि हर अउ ब्रम्हा कर जोरे

तोर संग बांधे आस के डोरे

तिरसुल बेद सुदर्शन धर के 

क्रोध में माता बिकट के गरजे



ये हो सिंगनाथ ले धरती कांपे

धर लंका एक कोस तोर पांव

हो ये हो आया कईसे के गुण तोर गांव


हो ये हो महामाई हो कईसे के गुण तोर गांव




                 अंतरा 3


अति गुमान महिसासुर आये

तोर माया ला जान नई पावै

तोला जान के अबला नारी

हांस हांस के देवै गारी

कारी काया तोर नैन म लाली

धर के रूप बिकट रूप बिकराली

धरी त्रिशुल दौडे महामाया 

छिन्न भिन्न करि डारे काया




यहो महिसासुर संहार ला कर के

तिहु लोक मे बाढ़े तोर नाव 

हो ये हो आया कईसे के गुण तोर गांव


हो ये हो जगजननी कईसे के गुण तोर गांव

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