अजब सजे दरबार माई के, जहां विराजी माई कालिका
यहाँ सुभास सोनी द्वारा गाया गया भजन "जहाँ विराजी माई कालिका" के पूर्ण लिरिक्स (Lyrics) दिए गए हैं।
जहाँ विराजी माई कालिका - लिरिक्स
मुखड़ा:
अजब सजे दरबार माई के, जहाँ विराजी माई कालिका
मैया जहाँ विराजी माई कालिका...
अजब सजे दरबार माई के, जहाँ विराजी माई कालिका
मैया जहाँ विराजी माई कालिका...
अंतरा 1:
जुग-जुग से मैया आसन डारे
सुनत है सबकी पुकार माँ, मैया सुनत है सबकी पुकार माँ
ऊँचे नींव में गढ़ है निरालो, बैठी जहाँ गढ़ कालिका
मैया बैठी जहाँ गढ़ कालिका...
मंत्र:
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अंतरा 2:
निबुआ की माला चढ़त माई को
सदर रूप सुहाए माँ, मैया सदर रूप सुहाए माँ...
कलकत्ते की माई कालिका, महिमा बरनी ना जाए माँ
मैया महिमा बरनी ना जाए माँ...
अंतरा 3:
लंबी जीभन काली माता, रूप बड़ो विकराल माँ
मैया रूप बड़ो विकराल माँ...
छत्तीसगढ़ में धाम बनो है, पाताल भैरवी कहाय माँ
मैया पाताल भैरवी कहाय माँ...
अंतरा 4:
खप्पर खून से भरे भवानी, बड़ो खड़ग ले हाथ माँ
मैया बड़ो खड़ग ले हाथ माँ...
ऊँची पहाड़िया पावागढ़ में, लाल ध्वजा लहराए माँ
मैया लाल ध्वजा लहराए माँ...
अंतरा 5:
बड़े-बड़े दो नैन माई के, देख बला टल जाए माँ
मैया देख बला टल जाए माँ...
अजब सजे दरबार माई के, जहाँ विराजी माई कालिका
मैया जहाँ विराजी माई कालिका...
समाप्ति:
जुग-जुग से माँ आसन डारे, सुनत है सबकी पुकार माँ
अजब सजी दरबार माई के, गजब सजी बड़ गजब सजी
जहाँ विराजी माई कालिका, मैया जहाँ विराजी माई कालिका।
वीडियो जानकारी:
गायक: सुभास सोनी (Subhash Soni)
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