जब दौड़े कालिका रक्त पियन हा (lyrics)
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर - जसगीत लिरिक्स
भजन: जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर
गायक: आचार्य पं. युवराज पाण्डेय जी
विधा: छत्तीसगढ़ी जसगीत
(मुखड़ा)
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर
रण गरजे कालिका रक्त पियन बर हा
ये हो रक्त पियन बर हो, रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा...
(अंतरा 1)
रक्त पिए बर दौड़े कालिका, हाथन खप्पर धारे
दूजे हाथ सिर धरे कालिका, तीजे हाथ तलवारे
हो क्रोध मा भारी गरजे कालिका, चौथा हाथ पसारे
लाल-लाल जिहिया भवानी, रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा...
(अंतरा 2)
लाल-लाल जिहिया भवानी, नयन बने बिकराले
बाल उड़े जब दौड़े कालिका, लाली सिंदूर खिलाले
हो असुरन को तुम मार गिराए, रक्त खप्पर मा डारे
हिंगलाज दौड़ चली आए, रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा...
(अंतरा 3)
रक्त पिए मोर काली भवानी, अगम भए खुशहाली
बूंद भर रक्त गिरे धरती पर, दानव बड़े अपारे
गुजार कालिका रुण्ड-मुण्ड कर, रैन दिसाले
छनन-छनन बाजे पैजनिया, रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा...
(अंतरा 4)
छनन-छनन बाजे पैजनिया, गले मुण्ड के माला
कमर मा सोहे करधनिया, तोरा हाथ मा शूल कराला
रक्त पिए बर दौड़े कालिका, जस हाथ मतवाला
नयन बने तेजवाला, रक्त पियन बर हा
जब दौड़े कालिका रक्त पियन बर हा..
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