"रणभन रणभन तुम खेलो मईया" जस लिरिक्स
भजन: रणभन रणभन हो तुम खेलो मईया
गायक: आचार्य श्रीयुत पं. युवराज पाण्डेय जी
मुखड़ा
रणभन रणभन हो
तुम खेलो मईया, रणभन रणभन हा...
तुम खेलो मईया, रणभन रणभन, रणभन रणभन,
रणभन रणभन, रणभन रणभन हो...
तुम खेलो मईया भवानी, तुम खेलो मईया।
माता मंगला मोर देवी हो मंगला,
माता मंगला मोर देवी हो मंगला।
मूरख में हो मंगल, लेना गले ना घूमा आटे मोर मईया,
गलीन को मेरा हे मोर मईया,
नाले ना घूमा मोरी मईया, नाले ना घूमा मोरी मईया।
अंतरा 1
सबो पारा जावे हो मईया खेले को आवे,
सबो पारा जावे मईया खेले को आवे।
बामन पारा झन जावे हो देवी कालिका,
बामन टूरा कराहे का मोहिनी,
बावन टोर कराहे एक मोहिनी।
शास्त्र मा देही बोलूं भा मोरी मईया,
मंत्र मा देही बोलूं भा मोरी मईया।
माता मंगला मोर देवी हो मंगला,
माता कालिका मोर देवी हो कालिका।
अंतरा 2
सबो पारा जावे हो मईया खेले को दे आवे,
ठाकुर पारा झन जावे हो देवी कालिका।
ठाकुर टूरा कराहे मोहिनी,
ठाकुर टूरा कराहे मोहिनी।
शास्त्र मा देही बोलूं भाई मोरी मईया,
अम्बा देही बोलूं भाई मोरी मईया।
अंतरा 3
तेलीन पारा झन जावे हो देवी कालिका,
तेलीन टूरा कराहे का मोहिनी,
तेल मा देही बोलूं भाय मोरी मईया,
माता कालिका मोर देवी हो कालिका।
अंतरा 4
खद-बद खद-बद घोड़ा कुदा गे मलनिया के पारा,
मलनिया मलनिया हम परत है का सो जागे,
मलनिया तो कदम के उपरी मलन पावे।
सुन तो रे मोर मलनिया राजा अंगना दुलरवा,
काहे काम तोहे परे दुलरवा, काहे कर को आए?
मलनिया मोर करनवा मैं आए।
समापन
रणभन रणभन, रणभन रणभन,
तुम खेलो दुलरवा, तुम खेलो दुलरवा।
बोलिए मां भवानी की जय! जय माता दी!
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